मुंबई, 25 अक्टूबर:
पीसविंग प्रोडक्शन प्रा. लि. की चर्चित फिल्म ‘बिसाही’ लगातार दर्शकों का दिल जीत रही है और देशभर में एक सामाजिक संवाद की तरह फैल रही है। सीमित बजट और बिना किसी बड़े स्टारकास्ट के बावजूद, फिल्म ने अपने सशक्त विषय, यथार्थवादी प्रस्तुति और गहरे भावनात्मक प्रभाव से सिनेमा जगत में अपनी अलग पहचान बना ली है।
लेखक-निर्देशक अभिनव ठाकुर और निर्माता नरेंद्र पटेल की यह फिल्म ग्रामीण भारत में अब भी प्रचलित ‘डायन-बिसाही’ जैसी कुप्रथाओं पर गहरी रोशनी डालती है। सच्ची घटनाओं से प्रेरित यह मनोवैज्ञानिक-सामाजिक थ्रिलर न सिर्फ अंधविश्वास की जड़ों को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि किस तरह डर और सत्ता मिलकर इंसानियत को कुचल देते हैं।
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कहानी और मुख्य किरदार
फिल्म की कहानी स्तुति (पूजा अग्रवाल) नामक एक युवा व्लॉगर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक ऐसे गांव में पहुँचती है जहाँ अंधविश्वास के नाम पर महिलाओं को अब भी “डायन” कहकर सताया जाता है। उसकी खोज सिर्फ एक डॉक्युमेंटेशन नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ है जो सच बोलने वालों को मिटा देना चाहती है।
फिल्म में रवि साह ने एक मुख्य भूमिका निभाई है, जिनका गहराई से भरा प्रदर्शन कहानी को और भी वास्तविक और प्रभावशाली बनाता है। साथ ही इंदु प्रसाद और रामसुजन सिंह जैसे कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से फिल्म में सच्चाई और संवेदना दोनों का संतुलन बनाए रखा है।
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दर्शकों की सराहना और बढ़ता प्रभाव
बिहार, झारखंड, असम, उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में ‘बिसाही’ को दर्शकों की शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है।
सिंगल-स्क्रीन थिएटर्स में लगातार बढ़ते शो और भरपूर दर्शक उपस्थिति ने यह साबित किया है कि सच्ची और संवेदनशील कहानियाँ आज भी लोगों के दिलों तक पहुँचती हैं।
फिल्म अपने प्रदर्शन के 5वें हफ़्ते में भी देशभर के चुनिंदा सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है, जो इस बात का प्रमाण है कि दर्शक अब भी इस सच्चाई से गहरा जुड़ाव महसूस कर रहे हैं और इसकी गूंज थमने का नाम नहीं ले रही।

निर्माता नरेंद्र पटेल ने कहा,
“बिसाही ने दिखाया कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के आईने की तरह काम कर सकता है। दर्शकों का यह प्यार हमें बताता है कि सच्चाई हमेशा अपनी राह बना ही लेती है।”
निर्देशक अभिनव ठाकुर ने कहा,
“बिसाही हमारे समय की उन आवाज़ों की कहानी है, जिन्हें लंबे समय तक दबा दिया गया। यह फिल्म सच, साहस और संवेदना के उस संघर्ष की कहानी है जो आज भी हमारे समाज में जारी है।”
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सच्चे सिनेमा की गूंज
मज़बूत वर्ड ऑफ माउथ, शानदार IMDb रेटिंग्स और लगातार बढ़ते दर्शक समर्थन के साथ ‘बिसाही’ यह साबित कर रही है कि सच्चाई पर आधारित ईमानदार सिनेमा आज भी दिलों में गूंजता है। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक सोच है — जो पर्दे से निकलकर समाज तक पहुँच रही है।

